Drishya Dharma
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मित्रलाभ — सच्ची मित्रता का महत्व
मनुष्य हो या पशु, जीवन में सुख और सुरक्षा तभी मिलती है जब सच्चे मित्र साथ हों। और आज की इस कथा का मूल संदेश यही है। आइये कहानी में आगे बढ़ते हैँ-
बहुत समय पहले एक घना जगंल हुआ करता था और उस जंगल में एक कबूतरों का झुण्ड रहता था। और चिरयुद्ध नामक कबूतर, उन सबका मुखिया था — चिरयुद्ध बहुत ही समझदार कबूतर था.
चिरयुद्ध के साथ सभी कबूतर हर रोज़ भोजन की खोज में निकलते और सूर्यास्त से पहले वापस अपने जंगल में लौट आते। चिरयुद्ध सदा उन्हें सावधान करता — तुम सभी मेरे साथ रहो, अकेले इधर उधर मत जाओ । वो उन्हें समझाता की अगर हम सब मिलजुलकर रहेंगे तो कोई शिकारी हमे नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा।” सभी कबूतर उसकी आज्ञा मानते।
एक दिन कुछ ऐसा हुआ की ! भोजन की तलाश में कबूतरों का झुण्ड एक ऐसे खेत पर जा पहुँचा जहाँ चारों ओर चावल के दाने बिखरे थे। चिरायुध ने दानों को देखा और बोला — “भाइयों! यह दाने कुछ अजीब से लग रहे हैं। सोचने वाली बात है की भला ये यूँ ही खुले में क्यों पड़े हैं? मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है तुम सब सावधान रहना ये किसी शिकारी का जाल हो सकता है।” लेकिन कहते हैं है की जब आपको पर भूख सत्ता रही हो तो उस समय कुछ नहीं सूझता कबूतरों के झुण्ड का भी कुछ ऐसा ही हाल था. सभी कबूतर भूख से व्याकुल थे। वे बोले — अरे मुखिया जी ! भूख लगी है, इतने दाने पड़े हैं, थोड़े से दाने खा लेते हैं।”
चिरायुध ने थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा — सावधान! मुझे इसमें कोई छल दिखाई दे रहा है। सभी कबूतर इतने ज़्यादा भूखे थे की उन्होंने चिरयुद्ध की एक न सुनी और भूख से व्याकुल कबूतरों का पूरा झुण्ड उन दानों पर टूट पड़ा।
जैसे ही उन्होंने दाने चुगने शुरू किए — तो अचानक सभी ने ये महसूस किया की उनके पंख और पैर जाल में फँस चुके है! फिर क्या था उन सभी कबूतरो ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया “हाय! हम फँस गए! अब क्या होगा?” मुखिया जी हमे माफ़ कर दो हमे आपकी बात सुन लेनी चाहिए थी.
तभी पास में छिपा हुआ शिकारी हँसते हुए बाहर निकला। और बोला —वाह! क्या बात है लगता है आज भगवान मुझ पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान है एक साथ पूरा झुण्ड मेरे जाल में फँस गया। अब तो कई दिनों का भोजन मिल गया।”
कबूतर घबरा कर , रोने लगे, और ज़ोर ज़ोर से अपने पंख फड़फड़ाने लगे।
लेकिन चिरायुद्ध ने धैर्य से कहा — भाइयों! डरने की आवश्यकता नहीं। यदि तुम सब अलग-अलग छूटने की कोशिश करोगे तो असफल रहोगे। पर यदि हम सब मिलकर एक ही दिशा में उड़ेंगे तो यह जाल भी हमारे साथ उड जाएगा।”
सभी को चिरयुद्ध की बात समझ आ गई और वो सभी कबूतर बोले — “मुखिया जी , आपकी बात सही है। हम सब मिलकर प्रयास करेंगे।”
तुरन्त चिरायुध ने आदेश दिया — “सब लोग एक साथ पंख फड़फड़ाओ और आकाश की ओर उड़ो!” सभी ने अपने मुखिया के आदेश का पालन करते हुए अपने पंख फड़फड़ाने शुरू कर दिये और फिर हुआ एक चमत्कार! जाल सहित पूरा कबूतरों का झुण्ड आकाश में उड़ गया।
शिकारी उन्हें उड़ते देख हताश हो गया। और उसने कहा — अरे! इतना बड़ा शिकार मेरी आँखों के सामने से निकल गया!
कबूतरों का झुण्ड उड़ता हुआ दूर चला गया। लेकिन अब प्रश्न था कि वो सब जाल से मुक्त कैसे हों?
चिरायुध ने फिर से सोच कर कहा “भाइयों! एक चूहा जिसका नाम है हिरण्यक। वो मेरा बहुत प्रिय और सच्चा मित्र है और वह बहुत चतुर है और मेरी मित्रता की कद्र करता है। वही हमें इस जाल से मुक्त कर सकता है।”
मुखिया की बात सुन कर सभी ने कहा “तो चलो,फिर देर किस बात की उसी के पास चलते हैं।” और फिर सभी ने चिरायुद्ध का आदेश पाकर एक बार फिर से उड़न भरनी शुरू की और थोड़ी देर बाद सभी कबूतर , हिरण्यक चूहे के बिल के पास उतर गए।
चिरायुध ने आवाज दी — “मित्र हिरण्यक! बाहर आओ, तुम्हारा मित्र आज संकट में है हमारी सहायता करो
हिरण्यक ने चिरयुद्ध की आवाज़ सुनी और वो अपने बिल से बाहर आया और अपने मित्र चिरायुध को जाल में फँसा देखकर घबरा गया। उसने कहा — अरे मित्र! यह क्या हो गया? तुम इस जाल में कैसे फँस गए?”
चिरायुध ने हिरण्यक पूरी बात विस्तार से बताई।तो
हिरण्यक ने कहा — चिन्ता मत करो।मित्र मैं अभी अपने इन तीखे दाँतों से इस जाल को कुतरकर तुम सबको मुक्त कर दूँगा।”
फिर वो सबसे पहले अपने मित्र चिरायुध के पास आया और अपने दांतो से उसके बन्धन काटने लगा।
लेकिन तभी चिरायुध ने कहा — नहीं मित्र! पहले मेरे साथियों को मुक्त करो। नेता का काम है कि वह अपने हित से पहले प्रजा का हित सोचे। तो इसलिए मेरी तुमसे विनती की पहले तुम इन सब के बंधन काटो चिरयुद्ध की करुणा को देख कर हिरण्यक मुस्कराया और बोला , वाह मित्र! तुम्हारे जैसे नेता के कारण ही यह झुण्ड सुरक्षित है।” और फिर हिरण्यक ने पहले बाकि सारे कबूतरों के बन्धन काटे और अन्त में मुखिया चिरायुध के बंधन को काट कर उसको जाल से मुक्त कर दिया
अब सभी कबूतर आज़ाद थे।और वे सभी खुशी से चिरायुध और हिरण्यक की प्रशंसा करने लगे।
तभी चिरायुद्ध ने सभी को सिख देते हुए और हिरण्यक की प्रशंसा करते हुए कहा कि सच्चे मित्र वही होते हैं जो संकट में काम आते हैं। आज यदि हिरण्यक न होता तो हम सब मारे जाते.
तो साथियो ये कहानी हमे सिखाती है कि संकट की घड़ी में एकता सबसे बड़ा हथियार है। और सच्चा मित्र वही है जो संकट में काम आए। और सच्चा नेता वही है जो अपने से पहले दूसरों का हित देखे।
और इसी के साथ इस कहानी का समापन करते हैं, धन्यवाद
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