Drishya Dharma
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आधी नींद की बड़बड़ाहट
इस कहानी में हम जानेंगे की किसी का अपमान करने पर और सुनी सुनाई बातों पर बिना सोचे समझे एक्शन लेने से क्या नुकसान उठाना पड़ सकता है.
पहले वर्धमान नाम का एक नगर था। उस नगर में एक व्यापारी रहता था। वह इतना होशियार और कुशल था कि राजा ने उसे राज्य का प्रशासक बना दिया। व्यापारी अपनी बुद्धिमानी से न केवल राजा को प्रसन्न रखता था, बल्कि आम जनता को भी न्याय और सुख देता था। कुछ समय बाद व्यापारी की बेटी की शादी तय हुई। व्यापारी ने सोचा—
“इतना बड़ा अवसर है, क्यों न एक ऐसा भोज रखा जाए जिसे लोग सालों तक याद रखें।”
उसने नगर के हर छोटे-बड़े व्यक्ति को आमंत्रित किया। राजा-रानी से लेकर साधारण जनता तक—हर कोई भोज में आया। भोज में आए मेहमानों का व्यापारी ने बड़े सम्मान से स्वागत किया। स्वादिष्ट भोजन परोसा गया, और जाते समय सबको गहने और तोहफे देकर विदा किया गया।
अब उसी भोज में महल का एक सेवक भी आया। वह वही सेवक था जो रोज़ महल में झाड़ू लगाता था।
अज्ञानवश वह उस जगह बैठ गया जो राजपरिवार के लिए निर्धारित थी। यह देखकर व्यापारी का चेहरा लाल हो गया। वह क्रोध से भरकर बोला—“अरे! ये जगह तुम्हारे लिए नहीं है।” उसने तुरंत सैनिकों को बुलाया और सेवक को सबके सामने धक्के देकर बाहर निकलवा दिया।
अपमान से सेवक का दिल जल उठा। वह मन ही मन सोचने लगा— “मुझे इतने लोगों के सामने नीचा दिखाया गया है। इस व्यापारी ने मुझे अपमानित किया है। मैं इसे सबक ज़रूर सिखाऊँगा।” कुछ दिन बीते। एक दिन सेवक राजा के कक्ष में झाड़ू लगा रहा था। राजा आधी नींद में लेटे हुए थे। सेवक ने धीरे-धीरे बड़बड़ाना शुरू किया— “ये व्यापारी भी बड़ा हद करता है… रानी के साथ दुर्व्यवहार करता है…” राजा चौकन्ने होकर उठ बैठे। उन्होंने तुरंत सेवक से पूछा— “क्या? यह सच है? तुमने सचमुच ऐसा देखा है?” सेवक तुरंत घुटनों के बल बैठ गया और बोला— “महाराज! मुझे क्षमा कर दीजिए। मैं रातभर जुआ खेलता रहा, नींद पूरी नहीं हुई। नींद-नींद में पता नहीं क्या बक दिया। मेरा मतलब कुछ और नहीं था।” राजा ने चुप्पी साध ली। लेकिन उसके मन में व्यापारी को लेकर शक का बीज बो दिया गया। अब राजा को व्यापारी पर भरोसा नहीं रहा। उसी दिन से व्यापारी की शक्ति और अधिकार घटा दिए गए। उसका महल में आना-जाना भी रोक दिया गया।
दूसरे दिन जब व्यापारी महल पहुँचा, तो सैनिकों ने उसे दरवाज़े पर ही रोक दिया। व्यापारी हैरान रह गया। तभी पीछे से वही सेवक मुस्कुराते हुए बोला— “अरे! सावधान रहना। ये वही व्यापारी हैं जो ताकत के दम पर लोगों को बाहर फिंकवा देते हैं। जैसे भोज में मेरे साथ किया था।” इतना सुनते ही व्यापारी सब समझ गया। उसने जान लिया कि उसके अपमान का बदला लेने के लिए सेवक ने राजा के मन में जहर घोला है। लेकिन व्यापारी समझदार था। उसने बदले का रास्ता नहीं चुना।
कुछ दिनों बाद उसने सेवक को अपने घर बुलाया। उसकी खूब आवभगत की। उसे अच्छे से खिलाया-पिलाया, कपड़े और उपहार दिए। फिर बड़ी विनम्रता से बोला— “भाई, उस दिन मुझसे गलती हो गई। गुस्से में मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। कृपया मुझे माफ़ कर दो।” सेवक का मन पिघल गया। उसने कहा— “व्यापारी जी, आपने न केवल मुझसे माफ़ी मांगी, बल्कि मेरी इतनी खातिरदारी भी की। अब निश्चिंत रहो। मैं राजा से सब ठीक करवा दूंगा।” अगले दिन वही सेवक फिर राजा के कक्ष में झाड़ू लगाने पहुँचा। राजा फिर हल्की नींद में थे। सेवक ने फिर बड़बड़ाना शुरू किया— “हे भगवान! हमारा राजा कितना मूर्ख है… गुसलखाने में बैठकर खीरे खाता है…” राजा गुस्से से तमतमा उठे— “क्या बकवास कर रहे हो! अगर तुम मेरे सेवक न होते तो अभी नौकरी से निकाल देता।” सेवक तुरंत चरणों में गिर पड़ा और बोला— “महाराज, क्षमा करें। नींद में पता नहीं क्या बोल गया। अब कभी ऐसा नहीं होगा।”
राजा गहरी सोच में पड़ गए। उन्होंने मन ही मन कहा— “जब यह मेरे बारे में ऐसी बेहूदी और असंभव बातें कर सकता है, तो व्यापारी के बारे में भी निश्चित ही झूठ बोला होगा। मैंने व्यर्थ ही एक ईमानदार आदमी को दंड दिया।” अगले दिन राजा ने सभा बुलाई। व्यापारी को बुलाकर उसके सभी अधिकार वापस कर दिए। सभी दरबारियों के सामने राजा ने स्वीकार किया—
“एक योग्य और ईमानदार व्यक्ति पर बिना जांच के शक करना मेरी भूल थी। आज से व्यापारी का मान-सम्मान पहले जैसा ही रहेगा।”
व्यापारी ने राजा को प्रणाम किया। उसके चेहरे पर गर्व नहीं, बल्कि विनम्रता और शांति झलक रही थी। इस प्रकार राजा ने व्यापारी को फिर से महल में प्रवेश और राज्य में व्यापर करने की फिर से आज्ञा देदी और व्यापारी को भी समझ आज्ञा की कभी किसी को छोटा समझ कर उसका उपहास यानि मज़ाक नहीं बनाना चाहिए
इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है की हमें हर किसी के साथ आदर और सम्मान से पेश आना चाहिए, चाहे वह व्यक्ति छोटा हो या बड़ा। और कभी भी सुनी सुनाई आधी अधूरी बातो पर भरोसा नहीं करना चाहिए क्योकि ऐसा करने से हमें अपने दांपत्य जीवन में काफी बड़े नुकसान उठाने पड़ सकते हैं इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले सच्चाई की पूरी जाँच कर लेनी चाहिए।
धन्यवाद
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