Drishya Dharma
Read this spiritual story.
कछुआ और बंदरों की सभा
मित्रता, शत्रुता और राजनीति सिर्फ राजाओं की ही नहीं, बल्कि हर समूह और समाज की ज़रूरत है। जब आपसी मतभेद बढ़ते हैं, तो बाहरी शत्रु ही मज़बूत हो जाते हैं। कथा है—”कछुआ और बंदरों की सभा।”.
एक घने जंगल में एक बड़ा बंदर-समूह रहता था। वे संख्या में बहुत थे और पूरे जंगल पर अपनी धाक जमाए रखते थे। मगर उनमें एक समस्या थी—उनका कोई राजा नहीं था। एक दिन सभी बंदर इकट्ठा हुए और तय किया कि अब हमें भी एक राजा चाहिए, ताकि सबका नेतृत्व हो सके।
सभा लगी। हर बंदर अपनी-अपनी बात रखने लगा।
एक बंदर बोला—“राजा वही होना चाहिए जो सबसे बलवान हो।”
दूसरा बंदर बोला—“नहीं, राजा वही होना चाहिए जो सबसे ऊँचे पेड़ पर चढ़ सके।”
तीसरा बोला—“राजा वही होना चाहिए जो सबसे ऊँची आवाज़ में चिल्लाए।”
इस तरह पूरी सभा बहस और हंगामे से भर गई। तभी पास के तालाब से एक कछुआ धीरे-धीरे वहाँ पहुँचा। वह चालाक और अनुभवशील था।
कछुआ बोला— “हे बंदरो! तुम लोग क्यों झगड़ रहे हो? अगर राजा बनाना है तो मुझे चुनो। मैं धीमा ज़रूर हूँ, मगर स्थिर हूँ। मैं जल्दबाज़ी नहीं करता और हमेशा सोच-समझकर निर्णय लेता हूँ। स्थिरता ही असली नेतृत्व है।”
सारे बंदर ठहाका मारकर हँस पड़े—“हा-हा-हा! अरे, यह धीरे-धीरे चलने वाला कछुआ हमारा राजा बनेगा? यह तो मज़ाक है!”
एक बंदर बोला—“हम तो फुर्तीले और तेज़ हैं और राजा कोई रेंगने वाला जीव कैसे हो सकता है?” लेकिन कछुए की बात सुनकर बंदरों में मतभेद और बढ़ गया।
कुछ बंदरों ने कहा—“देखो, कछुआ बुरा नहीं कह रहा। उसकी बात में स्थिरता है।”
बाकी बंदर गुस्से में बोले—“नहीं! कछुआ कभी राजा नहीं हो सकता। राजा तो हममें से ही कोई होगा।”
अब पूरा झुंड दो हिस्सों में बँट गया। कुछ कछुए के पक्ष में, कुछ उसके विरोध में। वे आपस में झगड़ने लगे—
“हमारे पक्ष का राजा सही है।” “नहीं! हमारे पक्ष का राजा सही है।”
जंगल के ऊपर उड़ते गिद्धों ने यह शोरगुल सुना। उन्होंने देखा कि बंदर आपस में लड़ने में व्यस्त हैं। गिद्धों के सरदार ने कहा—“यह तो अच्छा मौक़ा है। जब तक ये आपस में लड़ते रहेंगे, हम इन्हें आसानी से मारकर भोजन कर सकते हैं।” और फिर दर्जनों गिद्ध बंदरों पर टूट पड़े। कुछ बंदर पेड़ों से गिर पड़े, कुछ डरकर इधर-उधर भागे। लेकिन कछुआ अपनी खोल में छिपकर सुरक्षित बैठा रहा।
थोड़ी ही देर में बंदरों का बड़ा नुकसान हो गया। जो बच गए, वे पछताते हुए बोले—“काश! हम आपस में न झगड़ते। कछुए ने सही कहा था, स्थिरता और शांति ही असली शक्ति है। हमारी फूट ने ही गिद्धों को ताक़त दी।”
कछुआ शांत स्वर में बोला— “ याद रखो—जो आपसी लड़ाई में उलझे रहते हैं, वे हमेशा बाहरी शत्रु का शिकार बनते हैं।”
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि झगड़े और फूट हमेशा बाहरी शत्रु को मज़बूत करते हैं।
यदि समाज या समूह एकजुट रहे तो कोई भी शत्रु उस पर विजय नहीं पा सकता। सच्चा नेतृत्व वही है जो सबको साथ लेकर चले, न कि जो सिर्फ शक्ति या तेज़ी पर घमंड करे.
धन्यवाद।
You can read spiritual stories directly on the story reader page. Each story provides complete text content that you can read online without any app download.
Yes, Sanatan provides spiritual stories in multiple languages. You can switch the interface language using the language toggle to read stories in your preferred language.
Some stories have video versions available. When a video is available, you will see a Watch Story button alongside the Read Story button on the story card.