कौआ, हंस और सोने की मछली

    कहते हैं कि बुद्धि और नीति केवल ताक़तवरों के पास ही नहीं होती, बल्कि कभी-कभी साधारण प्राणी भी अपनी चतुराई से बड़े-बड़ों को हरा देते हैं। कथा है, ‘कौआ, हंस और सोने की मछली की ’।

    बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य के पास एक विशाल झील थी। उस झील में हज़ारों मछलियाँ रहती थीं। पर उनमें सबसे अद्भुत थी एक सोने की मछली, जिसकी चमक सूरज की तरह दमकती थी।

    झील के किनारे एक सफ़ेद हंस रहता था। वह झील की रक्षा करता और सब पर राज करता। झील के सारे पक्षी और जानवर उसकी इज़्ज़त करते थे। लेकिन पास ही एक काला कौआ भी रहता था। वह हंस से ईर्ष्या करता और सोचता—“सारा सम्मान इस हंस को क्यों मिलता है? अगर मैं सोने की मछली पकड़ लूँ, तो सारा राज्य मुझे धनवान और शक्तिशाली मानेगा।”

    कौआ रोज़ झील के ऊपर मंडराता और सोने की मछली को पकड़ने का मौका ढूँढता। लेकिन हर बार हंस उसे भगा देता। कौआ सोचने लगा—“सीधे ताक़त से जीतना मुश्किल है। मुझे राजनीति का सहारा लेना होगा।”

    कौए ने सोने की मछली के पास जाकर धीरे से कहा—“बहन, यह हंस तुम्हें सिर्फ इसलिए बचाता है ताकि लोग उसे महान समझें। असली राजा तो वह है जो तुम्हें आज़ादी दे। अगर तुम मेरे साथ आ जाओ तो मैं तुम्हें पूरे जंगल की झीलों में घूमने दूँगा।”

    सोने की मछली भोली थी। उसने कौए की बातों पर थोड़ा विश्वास करना शुरू किया। हंस ने यह सब दूर से देखा, लेकिन तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी। उसने सोचा—“राजनीति में धैर्य रखना ज़रूरी है। अगर मैं अभी कौए से झगड़ा करूँगा तो मछली और दूर हो जाएगी।”

    इसलिए हंस ने एक योजना बनाई। एक दिन हंस ने कौए को बुलाया और कहा—“भाई कौए, अगर तुम सच में इस झील और मछलियों का हित चाहते हो, तो पहले इस सोने की मछली की रक्षा की कसम खाओ। यह कसम वही खा सकता है जो ईमानदार और निष्ठावान हो।”

    कौआ डर गया। वह जानता था कि उसके इरादे साफ़ नहीं हैं। वह बहाने बनाने लगा—“अरे! कसम खाने की क्या ज़रूरत है? मैं तो पहले ही तुम्हारा साथी हूँ।” तभी सोने की मछली को समझ आ गया कि कौआ झूठ बोल रहा है। सोने की मछली ने कौए से मुँह मोड़ लिया और हंस के पास ही रहने लगी। कौए की योजना विफल हो गई। और पूरे जंगल में उसकी निंदा होने लगी।

    हंस ने कहा—

    “धोखे और छल से राज नहीं किया जा सकता। जो विश्वास तोड़ता है, वह कभी सम्मान नहीं पाता।” इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि राजनीति में धैर्य और सत्य की शक्ति सबसे बड़ी होती है। छल और चालाकी से थोड़ी देर के लिए लोग प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन अंततः सच्चाई की जीत होती है। जो ईर्ष्या और लालच में अंधा हो जाए, उसका सम्मान और विश्वास दोनों नष्ट हो जाते हैँ.

    धन्यवाद।

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